जोधपुर सूर्य नगरी (जोधाणा)
- सन् 1459 में राव जोधा द्वारा स्थापना
- जोधपुरी कोट को राष्ट्रीय पोशाक होने का गौरव प्राप्त है
- मेहरानगढ़ दुर्ग (मयूरध्वज) - मेहरानगढ़ का किला पहाड़ी के बिल्कुल ऊपर बसे होने के कारण राजस्थान के सबसे खूबसूरत किलाओं में से एक है। रावजोधा ने १५५८ में शासन करना शुरू किया . राव जोधा ने सोचा की मंडोर शासन करने के लिए सुरक्षित नही है इसलिए मंडोर से ८ किलोमीटर दूर चिड़ियाटुंक पहाड़ी पर १३ मि १४५९ को मेहरान की नीव रखी इसके सात द्वार है जिनमे जयपोल १८०६ में मानसिंह द्वारा निर्मित . किले के अंदर में भी पर्यटकों को देखने हेतु कई महत्वपूर्ण इमारतें हैं। जैसे मोती महल, सुख महल, फूलमहल आदि
- किरत सिंह सोड़ा की छतरी
- फतेहपोल राव अजीतसिंह द्वरा निर्मित
- राठौडो की कुल देवी नागणेची माता
- तोप - शम्भूबाण , किलकिला, गजनीखा
- जसवंत थड़ा - यह पूरी तरह से मार्बल निर्मित है। इसका निर्माण 1899 में राजा जसवंत सिंह (द्वितीय) और उनके सैनिकों की याद में किया गया था।
- उम्मेद भवन पैलेस - निर्माता महाराजा उम्मेद सिंह (छितर नामक पत्थर से निर्मित) यह बाढ़ राहत परियोजना के अंतर्गत निर्मित हुआ। जिसके कारण बाढ़ से पीड़ित जनता को रोजगार प्राप्त हुआ। यह महल सोलह वर्ष में बनकर तैयार हुआ।
- राई का बाग पैलेस - निर्माता रानी हाडी जी
- मंडोर दुर्ग (माण्डवपुर)
- उम्मेद बाग - १९३६ में जंतुआलय स्थापित
- नेहरु उद्यान
- बालसमंद झील - निर्माण : सन् ११५९ में परिहार शासको ने करवाया था
- कायलाना झील इसका निर्माण सर प्रतापसिंह
- सरदार समंद झील पाली मार्ग पर
- ओसियां - सचिया माता का मन्दिर , सूर्य मन्दिर
- राज रणछोड मन्दिर - निर्माण रानी राजकंवर ने
- माचिया सफारी अभ्यारण्य (कृष्ण मृग, जंगली बिल्ली, चिंकारा, नेवला )
- अमृता देवी अभयारण्य -
- धावाडोली अभयारण्य
- काजरी - मरूस्थल वनीकरण शोध केन्द्र 1952 (पुनर्गठित - केन्द्रीय शुष्क अनुसंधान संस्थान काजरी 1959)
- मारवाड़ महोत्सव
मेले
शीतलमाता मेला , कागा - चैत्र बदी अष्टमी
वीरपुरी मेला, मंडोर श्रावण माह का प्रथम सोमवार
बाबा रामदेव मेला , मशोरिया पहाड़ी - भाद्रपद सूदि द्वितीया
नौ सती मेला , बाणगंगा , बिलाडा - चैत्र अमावस्या
पारसनाथ मेला , करपंदा, बिलाडा - चैत्र शुक्ल पंचमी
राता भाकर वाला मेला , बालेसर - भाद्रपद द्वादशी


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