राजस्थानी भाषा
अ. राजस्थानी भाषा – प्राचीन काल में इस क्षेत्र कि भषा को मरुभाषा के नाम से जाना जाता था.सर्वप्रथम कर्नल जेम्स टॉड ने इस क्षेत्र कि भषा के लिए “राजस्थानी” शब्द का प्रयोग किया.
ब. राजस्थानी बोलियां – सर जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने सर्वप्रथम राजस्थानी बोलियों को बाटने का प्रयास किया. राजस्थानी बोलियों को उन्होंने पांच प्रमुख वर्गों में बांटा जो निम्न है
१. पश्चिमी राजस्थानी – मारवाड़ी, मेवाडी, बीकानेरी, शेखावाटी, ढारकी, बांगडी, खेराड़ी, मोडवाडी, देवडावाटी
२. उत्तरी-पूर्वी राजस्थानी – अहीरवाटी और मेवाती
३. दक्षिणी-पूर्वी राजस्थानी –रांगड़ी और सोंधवाडी
४. मध्य-पूर्वी राजस्थानी- ढूंढाड़ी, तोरावाटी, खड़ी, जैपुरी, काटेडा, राजावाटी, अजमेरी, किशनगढ़, नागर चोल, हाड़ोती आदि
५. दक्षिणी राजस्थानी – निमाड़ी आदि
मोतीलाल जी मेनारिया के अनुसार :-
१. मारवाड़ी, २. मेवाडी, ३. बागडी, ४. ढूंढाड़ी, ५. हाड़ोती, ६. मेवाती, ७. ब्रज, ८. मालवी, ९. रांगड़ी(मारवाड़ी+मालवी)

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