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"आधार": एक नजर में

"आधार": एक नजर में 

हर भारतीय को पहचान पत्र और विशिष्ट पहचान (यूआईडी) नंबर देने की शुरूआत 29 सितंबर 2010 को महाराष्ट्र के नंदूरबार जिले के तेंबली गांव से हुई
यूआईडी नंबर देने का जिम्मा नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को

इसके लिए पंजीकृत होने के बाद लोगों की अंगुलियों के निशान, आंखों की पुतली की छाप तथा तस्वीर ली जाती है
इसका मकसद लोगों को एक खास पहचान देना और सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाना है।

विवाद की वजह


विवाद सभी नागरिकों के बायोमेट्रिक आंकड़े जुटाने को लेकर था। गृह मंत्रालय का कहना था कि महापंजीयक को एनपीआर के जरिए आंकड़े जुटाने का 
काम पहले ही दिया जा चुका है। लेकिन नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में आधार योजना को भी ये आंकड़े जुटाने के लिए अधिकृत किया गया है। मंत्रालय इसके तहत आंकड़े बाहरी एजेंसी के जरिए आंकड़े जुटाए जाने और उनकी विश्वसनीयता को लेकर चिंतित था। 

एनपीआर को वैधानिक दर्जा

16 राज्यों में 40 करोड़ लोगों के अतिरिक्त "अधार" जारी किए जाने के यूआईडीएआई के प्रस्ताव को मंजूरी, 5791 करोड़ रूपए की अतिरिक्त राशि मिलेगी 
अन्य राज्यों में अंगुलियों के निशान और आंखों की पुतलियों की पहचान लेने का काम एनपीआर के तहत होगा 
एनपीआर को वैधानिक दर्जा देने के लिए संसद में विधेयक जल्द ही 
यूआईडीएआई "आधार" संख्या जबकि एनपीआर चिप आधारित बहु उद्देशीय राष्ट्रीय पहचान कार्ड जारी करेगा 
यूआईडीएआई आंकड़े और एनपीआर आंकड़ों में अंतर होने पर एनपीआर के आंकड़ों को मान्यता 

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