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पृथ्वी की संरचना

पृथ्वी की आकृति लध्वक्ष गोलाभ  के समान है। यह लगभग गोलाकार है जो ध्रुवों  पर थोड़ा चपटी है। पृथ्वी पर सबसे उच्चतम बिंदु माउंट एवरेस्ट है जिसकी ऊँचाई 8848 मी. है। दूसरी ओर सबसे निम्नतम बिंदु प्रशांत महासागर में स्थित मारियाना खाई है जिसकी समुद्री स्तर से गहराई 10,911 मी. है। पृथ्वी की आंतरिक संरचना कई स्तरों में विभाजित है। पृथ्वी की आंतरिक संरचना के तीन प्रधान अंग हैं- ऊपरी सतह भूपर्पटी (Crust), मध्य स्तर मैंटल (mantle) और आंतरिक स्तर धात्विक क्रोड (Core)। पृथ्वी के कुल आयतन का 0.5' भाग भूपर्पटी का है जबकि 83' भाग में मैंटल विस्तृत है। शेष 16' भाग क्रोड है।
पृथ्वी की संरचना
पटल 
८-४० किमी मोटी पटल , भूपृष्ट भी कहलाता है
पटल डॉ परतों से निर्मित है पटल की बाहरी परत अवसादी पदार्थो से बनी है . यह परत सिलिका व एलुमिनियम से निर्मित है और सियाल कहलाती है.

निचली परत बेसाल्टी चट्टानों से बनी है यह सिलिका व मैग्नीशियम से निर्मित है और सीमा कहलाती है

मेंटल
इसकी गहराई २९०० किमी तक है , इसकी उपरी परत एस्थिनोस्फियर कहलाती है,यह द्रव रूप में होती है 

कोर 
बाहरी कोर - २१०० किमी मोटी यह द्रव रूप में होती है
आंतरिक कोर - १३७० किमी मोटी. यह निकिल और आयरन से बनी होती है और इसको निफे कहते है. यह अत्यधिक गर्मी और दबाव के कारण जेल अवस्था में बदल जाती है

निचले स्तर का तापमान - भूसतह से १०० किमी निचे प्रति किमी १२ डिग्री से० तापमान में वृद्धि होती है. फिर अगले ३०० किमी तक २ डिग्री से० प्रति किमी उसके बाद १ डिग्री से० प्रति किलोमीटर के अनुसार तापमान में वृद्धि होती है


पृथ्वी के घटक

ऑक्सीजन = 46.50%
सिलिकन =27.72%
एलुमिनियम =8.13%
लोहा =5.01%
कैल्शियम =3.63%
सोडियम =2.85%
पोटेशियम =2.62%
मैग्नीशियम =2.09%
पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की आयु लगभग 4.6 अरब वर्ष है। पृथ्वी के सम्पूर्ण भूगर्भिक इतिहास को निम्नलिखित कल्पों  में विभाजित किया जा सकता है-
पूर्व कैम्ब्रियन - इसी काल से पृथ्वी की शुरुआत हुई। यह कल्प लगभग 57 करोड़ वर्ष पूर्व समाप्त हुआ। इस कल्प के दौरान भूपर्पटी, महाद्वीपों व महासागरों इत्यादि का निर्माण हुआ और जीवन की उत्पत्ति भी इसी काल के दौरान हुई।
पुराजीवी काल - 57 करोड़ वर्ष पूर्व से 22.5 करोड़ वर्ष तक विद्यमान इस कल्प में जीवों एवं वनस्पतियों का विकास तीव्र गति से हुआ। इस कल्प को निम्नलिखित शकों  में विभाजित किया गया है-
  • कैम्ब्रियन
  • आर्डोविसियन
  • सिल्यूरियन
  • डिवोनियन
  • कार्बनीफेरस
  • पर्मियन
मेसोजोइक कल्प- इस कल्प की अवधि 22.5 करोड़ से 7 करोड़ वर्ष पूर्व तक है। इसमें रेंगने वाले जीव अधिक मात्रा में विद्यमान थे। इसे तीन शकों में विभाजित किया गया है-
  • ट्रियासिक
  • जुरासिक
  • क्रिटैशियस 

सेनोजोइक कल्प - इस कल्प का आरंभ आज से 7.0 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ था। इस कल्प में ही सर्वप्रथम स्तनपायी जीवों का आविर्भाव हुआ। इस युग को पाँच शकों में विभाजित किया गया है-
  1. पैलियोसीन
  2. इयोसीन
  3. ओलिगोसीन
  4. मायोसीन
  5. प्लायोसीन
इस युग में हिमालय, आल्प्स, रॉकीज, एण्डीज आदि पर्वतमालाओं का विकास हुआ। 
नियोजोइक या नूतन कल्प  - 10 लाख वर्ष पूर्व से वर्तमान समय तक चलने वाले इस कल्प को पहले चतुर्थक युग  में रखकर पुन: प्लीस्टोसीन हिमयुग  तथा वर्तमान काल जिसे होलोसीन  कहा जाता है, में वर्गीकृत किया जाता है। 
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